कुरान - 25:23 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
وَقَدِمۡنَآ إِلَىٰ مَا عَمِلُواْ مِنۡ عَمَلٖ فَجَعَلۡنَٰهُ هَبَآءٗ مَّنثُورًا

Transliteration: (Wa qadimnaaa ilaa maa 'amiloo min 'amalin faja'alnaahuhabaaa'an manthooraa)

और उन्होंने जो कुछ भी अमल किए थे हम उनकी तरफ़ मुतवज्जे हुए [46], फिर हमने उन्हें उड़ती हुई बिखरी हुई धूल बना दिया [47], जो धूप की किरण में नज़र आती है [48]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 23

"और उन्होंने जो कुछ अमल किए थे हम उनकी तरफ़ मुतवज्जे हुए [46], फिर हमने उन्हें उड़ती हुई धूल बना दिया [47], जो धूप की किरण में नज़र आती है [48]!"

[46] काफ़िरों के दुनियावी आमाल का मुहासिबा

काफ़िरों ने दुनिया में जो ज़ाहिरी अच्छे काम किए थे—जैसे ग़रीबों को खाना खिलाना, सिला-रहमी करना, हाजियों की ख़िदमत या मेहमान नवाज़ी—अल्लाह तआला क़ियामत के दिन उन आमाल की हक़ीक़त ज़ाहिर फ़रमाएगा।

[47] 'हबा-अम मन्सूरन' यानी आमाल का बर्बाद व अकारत होना

चूँकि उनके ये आमाल ईमान और इख़्लास के बग़ैर थे, इसलिए अल्लाह तआला उन्हें बिखरी हुई धूल (हबा-ए-मन्सूर) की तरह उड़ा देगा। ईमान के बिना कोई भी नेक अमल अल्लाह की बारगाह में क़ुबूल नहीं होता।

[48] रौशनदान की धूप में तैरते हुए बारीक ज़र्रे

'हबा' उस निहायत बारीक ग़ुबार को कहते हैं जो दीवार के सुराख़ या खिड़की से आने वाली सूरज की धूप की किरण में उड़ता हुआ नज़र आता है, लेकिन छूने पर हाथ में कुछ नहीं आता। काफ़िरों के आमाल का भी आख़िरत में यही अंजाम होगा कि उनका कोई वज़न या सवाब नहीं रहेगा।

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