कुरान - 25:28 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
يَٰوَيۡلَتَىٰ لَيۡتَنِي لَمۡ أَتَّخِذۡ فُلَانًا خَلِيلٗا

Transliteration: (Yaa wailataa laitanee lam attakhiz fulaanan khaleelaa)

हाय मेरी बर्बादी! काश मैंने फ़लां (गुमराह करने वाले) को अपना गहरा दोस्त न बनाया होता [54]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 28

"हाय मेरी बर्बादी! काश मैंने फ़लां को अपना गहरा दोस्त न बनाया होता [54]!"

[54] बद-मज़हब और काफ़िर दोस्त की सोहबत पर अफ़सोस

उक़्बा कयामत के दिन अपने दोस्त उबई बिन ख़लफ़ का नाम लेकर रोएगा कि हाय मेरी बदबख़्ती! काश मैंने उस शैतान-सिफ़त काफ़िर को अपना दोस्त न बनाया होता जिसने मुझे रसूलुल्लाह ﷺ के दामन से जुदा कर दिया। इस आयत से साबित हुआ कि बद-अक़ीदा, गुमराह और गुनाहगार लोगों से दोस्ती इंसान को दोनों जहानों में बर्बाद कर देती है।

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