कुरान - 25:29 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
لَّقَدۡ أَضَلَّنِي عَنِ ٱلذِّكۡرِ بَعۡدَ إِذۡ جَآءَنِيۗ وَكَانَ ٱلشَّيۡطَٰنُ لِلۡإِنسَٰنِ خَذُولٗا

Transliteration: (Laqad adallanee 'aniz zikri ba'da iz jaaa'anee; wa kaanash Shaitaanu lil insaani khazoolaa)

बेशक उसने मुझे नसीहत (क़ुरआन) से भटका दिया इसके बाद कि वह मेरे पास आ चुकी थी; और शैतान तो इंसान को (ऐन वक़्त पर) बे-यारो-मददगार छोड़ देने वाला है [55]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 29

"बेशक उसने मुझे नसीहत से भटका दिया इसके बाद कि वह आ चुकी थी; और शैतान इंसान को दगा देकर छोड़ देता है [55]!"

[55] ज़िक्र (क़ुरआन) से गुमराही और शैतान का धोखा

वह ज़ालिम कहेगा कि क़ुरआन और नबी-ए-करीम ﷺ की नसीहत मुझ तक पहुँच चुकी थी और मैं हिदायत के क़रीब था, लेकिन इस बदबख़्त दोस्त ने मुझे बहकाकर हक़ से महरूम कर दिया। और शैतान की फ़ितरत ही यही है कि वह इंसान को गुनाह और कुफ़्र में मुब्तला करके ऐन मुसीबत के वक़्त अकेला और बेबस छोड़ देता है।

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