कुरान - 25:41 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
وَإِذَا رَأَوۡكَ إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَٰذَا ٱلَّذِي بَعَثَ ٱللَّهُ رَسُولًا

Transliteration: (Wa izaa ra awka iny yattakhizoonaka illaa huzuwan ahaazal lazee ba'asal laahu Rasoolaa)

और जब वे आपको देखते हैं, तो आपका सिर्फ़ मज़ाक़ ही उड़ाते हैं [74] कि 'क्या यही वह शख़्स हैं जिन्हें अल्लाह ने रसूल बनाकर भेजा है [75]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 41

"और जब वे आपको देखते हैं, तो आपका सिर्फ़ मज़ाक़ उड़ाते हैं [74] कि 'क्या यही वह शख़्स हैं जिन्हें अल्लाह ने रसूल बनाकर भेजा है [75]?'"

[74] हुज़ूर अक़दस ﷺ की शान-ए-अक़दस में काफ़िरों का इस्तिहज़ा (मज़ाक़)

जब कुफ़्फ़ार-ए-मक्का रसूलुल्लाह ﷺ को देखते, तो अपनी हिक़ारत और तकब्बुर की बिना पर उँगलियाँ उठाते और तंज़ करते। वे नबी-ए-रहमत ﷺ की रूहानी अज़मत, पाकीज़ा किरदार और मोजिज़ात से आँखें चुराकर महज़ दुनियावी माद्दिपरस्ती के तराज़ू में आपको तोलते थे।

[75] हिकमत-ए-इलाही और इंतिख़ाब-ए-रिसालत पर एतराज़

काफ़िर तअज्जुब और नफ़रत से कहते कि क्या मक्का और ताइफ़ के बड़े-बड़े मालदारों और सरदारों को छोड़कर अल्लाह ने इस यतीम और सादा ज़िन्दगी बसर करने वाले को रसूल बना दिया? यह उनके दिल की जलन और हिकमत-ए-इलाही के ख़िलाफ़ बगावत थी, क्योंकि अल्लाह ख़ूब जानता है कि रिसालत का अज़ीम बोझ उठाने का अहल कौन है।

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