Transliteration: (Wa laqad ataw 'alal qaryatil lateee umtirat mataras saw'; afalam yakoonoo yarawnahaa; bal kaanoo laa yarjoona nushooraa)
"और यक़ीनन ये उस बस्ती के पास से गुज़रे हैं जिस पर बुरी बारिश बरसाई गई थी [73]; क्या देखते नहीं थे? बल्कि वे दोबारा उठने की उम्मीद ही नहीं रखते थे [74]!"
यहाँ हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम की बस्तियों (सदूम व अमोरा) का ज़िक्र है, जिन पर अल्लाह ने गंधक और आग के पत्थरों की बारिश बरसाई और बस्तियों को उलट-पुलट कर दिया। कुरैश के तिजारती क़ाफ़िले मुल्क-ए-शाम जाते हुए बहर-ए-मुर्दार (Dead Sea) के किनारे इन वीरान खंडहरों के पास से बार-बार गुज़रते थे।
कुरैश इन खंडहरों को अपनी आँखों से देखते थे, मगर इससे कोई सबक़ या इब्रत हासिल नहीं करते थे। इसकी वजह यह थी कि उनके दिलों में क़ियामत के दिन दोबारा ज़िन्दा होने और ख़ुदा के सामने पेश होने का कोई ख़ौफ़ या यक़ीन ही न था।
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