Transliteration: (Alam tara ilaa Rabbika kaifa maddaz zilla wa law shaaa'a la ja'alahoo saakinan thumma ja'alnash shamsa 'alaihi daleelaa)
"ऐ हबीब! क्या आपने अपने रब को नहीं देखा [82] कि उसने साये को कैसे फैलाया [83]? चाहता तो साकिन कर देता [84]; फिर सूरज को रहनुमा बनाया [85];"
'अलम तरा इला रब्बिक' में हुज़ूर ﷺ को ख़िताब है। आरिफ़ीन फ़रमाते हैं कि हुज़ूर अक़दस ﷺ हर चीज़ में सबसे पहले अपने रब के जलाल व जमाल का मुशाहिदा फ़रमाते हैं। यहाँ साये के निज़ाम के ज़रिए अल्लाह की कामिल हिकमत और तदबीर पर ग़ौर करने की दावत दी गई है।
अल्लाह तआला सुबह-ए-सादिक़ से लेकर सूरज निकलने तक पूरी ज़मीन पर एक ठण्डा और राहत-बख़्श साया फैला देता है, जिससे मख़्लूक़ को रात की तारीकी और दिन की धूप के दरमियान सुकून हासिल होता है।
अगर अल्लाह चाहता तो इस साये को हमेशा के लिए ठहरा हुआ बना देता, सूरज निकलता ही न और हर तरफ़ ठंडक और तारीकी छाई रहती, जिससे ज़िंदगी मुहाल हो जाती।
अल्लाह ने सूरज को साये का रहनुमा और दलील बनाया। जैसे-जैसे सूरज बुलन्द होता है, साया घटता जाता है और जब सूरज ढलता है तो साया फिर बढ़ने लगता है। यह निज़ाम इंसानों के लिए नमाज़ों के औक़ात और कारोबार का ज़रिया है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat