कुरान - 25:45 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
أَلَمۡ تَرَ إِلَىٰ رَبِّكَ كَيۡفَ مَدَّ ٱلظِّلَّ وَلَوۡ شَآءَ لَجَعَلَهُۥ سَاكِنٗا ثُمَّ جَعَلۡنَا ٱلشَّمۡسَ عَلَيۡهِ دَلِيلٗا

Transliteration: (Alam tara ilaa Rabbika kaifa maddaz zilla wa law shaaa'a la ja'alahoo saakinan thumma ja'alnash shamsa 'alaihi daleelaa)

ऐ हबीब! क्या आपने अपने रब को नहीं देखा [82] कि उसने साये को कैसे फैला दिया [83]? और अगर वह चाहता तो उसे ठहरा हुआ (साकिन) बना देता [84]; फिर हमने सूरज को उसका रहनुमा (दलील) बना दिया [85]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 45

"ऐ हबीब! क्या आपने अपने रब को नहीं देखा [82] कि उसने साये को कैसे फैलाया [83]? चाहता तो साकिन कर देता [84]; फिर सूरज को रहनुमा बनाया [85];"

[82] दीदार-ए-इलाही और क़ुदरत का मुशाहिदा

'अलम तरा इला रब्बिक' में हुज़ूर ﷺ को ख़िताब है। आरिफ़ीन फ़रमाते हैं कि हुज़ूर अक़दस ﷺ हर चीज़ में सबसे पहले अपने रब के जलाल व जमाल का मुशाहिदा फ़रमाते हैं। यहाँ साये के निज़ाम के ज़रिए अल्लाह की कामिल हिकमत और तदबीर पर ग़ौर करने की दावत दी गई है।

[83] सुबह-ए-सादिक़ से तुलू-ए-आफ़्ताब तक साये का फैलाव

अल्लाह तआला सुबह-ए-सादिक़ से लेकर सूरज निकलने तक पूरी ज़मीन पर एक ठण्डा और राहत-बख़्श साया फैला देता है, जिससे मख़्लूक़ को रात की तारीकी और दिन की धूप के दरमियान सुकून हासिल होता है।

[84] साये को दायमी ठहराने की क़ुदरत

अगर अल्लाह चाहता तो इस साये को हमेशा के लिए ठहरा हुआ बना देता, सूरज निकलता ही न और हर तरफ़ ठंडक और तारीकी छाई रहती, जिससे ज़िंदगी मुहाल हो जाती।

[85] सूरज का साये पर रहनुमा होना

अल्लाह ने सूरज को साये का रहनुमा और दलील बनाया। जैसे-जैसे सूरज बुलन्द होता है, साया घटता जाता है और जब सूरज ढलता है तो साया फिर बढ़ने लगता है। यह निज़ाम इंसानों के लिए नमाज़ों के औक़ात और कारोबार का ज़रिया है।

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