कुरान - 25:46 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
ثُمَّ قَبَضۡنَٰهُ إِلَيۡنَا قَبۡضٗا يَسِيرٗا

Transliteration: (Thumma qabadnaahu ilainaa qabdany yaseeraa)

फिर हम उस (साये) को आहिस्ता-आहिस्ता अपनी तरफ़ समेट लेते हैं [86]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 46

"फिर हम उस (साये) को आहिस्ता-आहिस्ता अपनी तरफ़ समेट लेते हैं [86]।"

[86] साये का ब-तदरीज सिमटना और क़ुदरत-ए-इलाही

जैसे-जैसे सूरज चढ़ता है, साया धीरे-धीरे सिमटता चला जाता है यहाँ तक कि ज़वाल के वक़्त बिल्कुल कम रह जाता है। यह आहिस्ता-आहिस्ता का निज़ाम अल्लाह की बेमिसाल हिकमत है। अगर साया अचानक ग़ायब हो जाता और शदीद धूप पड़ जाती तो इंसान और नबातात की बर्दाश्त से बाहर होता।

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