कुरान - 25:50 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
وَلَقَدۡ صَرَّفۡنَٰهُ بَيۡنَهُمۡ لِيَذَّكَّرُواْ فَأَبَىٰٓ أَكۡثَرُ ٱلنَّاسِ إِلَّا كُفُورٗا

Transliteration: (Wa laqad sarrafnaahu bainahum li yazzakkaroo fa abaaa aksarun naasi illaa kufooraa)

और बेशक हमने इस (पानी के फेर) को उनके दरमियान बारी-बारी फेरा [94] ताकि वे नसीहत हासिल करें, मगर अक्सर लोगों ने नाशुक्री के सिवा हर बात से इनकार ही किया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 50

"और बेशक हमने इस पानी को उनके दरमियान बारी-बारी फेरा [94] ताकि नसीहत लें, मगर अक्सर लोगों ने नाशुक्री ही की।"

[94] मुल्कों और मौसमों में बारिश का गर्दिश करना

अल्लाह तआला हर साल दुनिया में एक मुअय्यन मिक़दार में बारिश बरसाता है, लेकिन हिकमत के तहत कभी एक शहर में ज़्यादा बारिश होती है और दूसरे में कम, कभी एक इलाक़े में सूखा पड़ता है और दूसरे में सैलाब आता है। यह तब्दीली इसलिए है ताकि बन्दे अल्लाह की कु़दरत को पहचानें, तौबा करें और उसकी दी हुई नेमतों का शुक्र अदा करें। मगर अफ़सोस कि अक्सर लोग इसे महज़ मौसम का तग़य्युर समझकर नाशुक्री करते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now