Transliteration: (Wa laqad sarrafnaahu bainahum li yazzakkaroo fa abaaa aksarun naasi illaa kufooraa)
"और बेशक हमने इस पानी को उनके दरमियान बारी-बारी फेरा [94] ताकि नसीहत लें, मगर अक्सर लोगों ने नाशुक्री ही की।"
अल्लाह तआला हर साल दुनिया में एक मुअय्यन मिक़दार में बारिश बरसाता है, लेकिन हिकमत के तहत कभी एक शहर में ज़्यादा बारिश होती है और दूसरे में कम, कभी एक इलाक़े में सूखा पड़ता है और दूसरे में सैलाब आता है। यह तब्दीली इसलिए है ताकि बन्दे अल्लाह की कु़दरत को पहचानें, तौबा करें और उसकी दी हुई नेमतों का शुक्र अदा करें। मगर अफ़सोस कि अक्सर लोग इसे महज़ मौसम का तग़य्युर समझकर नाशुक्री करते हैं।
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