Transliteration: (Linuhyiya bihee baldatan maitanw-wa nusqiyahoo mimmaa khalaqnaaa an'aamanw wa anaasiyya katheeraa)
"ताकि हम मुर्दा बस्ती को ज़िन्दगी बख़्शें, और अपनी मख़्लूक़ात में से बहुत से चौपायों और इंसानों को पानी पिलाएं [93]।"
सूखी, बंजर और मुर्दा ज़मीन बारिश के पानी से लहलहा उठती है, उसमें तरह-तरह के फल, अनाज और सब्ज़ियां उग आती हैं। यही पानी जंगलों और सहराओं में जमा होकर लाखों जंगली जानवरों, पालतू मवेशियों और इंसानों की प्यास बुझाता है। यह मुर्दा ज़मीन का ज़िन्दा होना इस बात की दलील है कि अल्लाह क़ियामत के दिन मुर्दों को भी इसी तरह दोबारा ज़िन्दा फ़रमाएगा।
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