कुरान - 25:51 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
وَلَوۡ شِئۡنَا لَبَعَثۡنَا فِي كُلِّ قَرۡيَةٖ نَّذِيرٗا

Transliteration: (Wa law shi'naa laba'asnaa fee kulli qaryatin nazeeraa)

और अगर हम चाहते तो हर बस्ती में एक डराने वाला (नबी) भेज देते [95]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 51

"और अगर हम चाहते तो हर बस्ती में एक डराने वाला भेज देते [95]।"

[95] हुज़ूर ख़ातमुन-नबिय्यीन ﷺ की अफ़ज़लियत और मुफ़र्रद रिसालत

अगर अल्लाह चाहता तो हर शहर और हर क़बीले में अलग-अलग नबी भेज देता जैसा कि बनी इसराईल में होता था। लेकिन अल्लाह ने अपने हबीब मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ को ऐसा अज़ीम मर्तबा और क़ुव्वत बख़्शी कि पूरी दुनिया की तमाम बस्तियों और क़ियामत तक के तमाम इंसानों के लिए अकेले आपको ही काफ़ी फ़रमा दिया। यह हुज़ूर ﷺ की शान-ए-ख़ात्मियत और शान-ए-जामइयत का इज़हार है।

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