कुरान - 25:53 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
۞وَهُوَ ٱلَّذِي مَرَجَ ٱلۡبَحۡرَيۡنِ هَٰذَا عَذۡبٞ فُرَاتٞ وَهَٰذَا مِلۡحٌ أُجَاجٞ وَجَعَلَ بَيۡنَهُمَا بَرۡزَخٗا وَحِجۡرٗا مَّحۡجُورٗا

Transliteration: (Wa Huwal lazee marajal bahraini haazaa 'azbun furaatunw wa haazaa milhun ujaaj; wa ja'ala bainahumaa barzakhanw wa hijran mahjooraa)

और वही है जिसने दो समंदरों को आपस में मिलाए रखा; यह एक मीठा और शीरीं है, और यह दूसरा खारी और कड़वा है; और उसने दोनों के दरमियान एक आड़ (बरज़ख़) और एक मज़बूत रुकावट बना दी [97] (कि वे आपस में घुल-मिल न जाएं)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 53

"और वही है जिसने दो समंदरों को मिलाए रखा; यह मीठा व शीरीं है, और वह खारी व कड़वा; और दोनों के दरमियान एक बरज़ख़ और मज़बूत आड़ बना दी [97]।"

[97] मीठे और खारी समंदर के दरमियान क़ुदरती बरज़ख़ (Barrier)

अल्लाह तआला की क़ुदरत का अज़ीम शाहकार है कि मीठे पानी के बड़े-बड़े दरिया खारी समंदरों में गिरते हैं और दोनों पानी आपस में छूते हुए बहते हैं, मगर अल्लाह ने उनके दरमियान एक अनदेखी कु़दरती आड़ (Barrier) क़ायम फ़रमा दी है कि न मीठा पानी खारी होता है और न खारी पानी मीठे को ख़राब करता है। आज की जदीद साइंस (Oceanography) भी इस क़ुरआनी हक़ीक़त की तस्दीक़ कर रही है।

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