Transliteration: (Wa ya'budoona min doonil laahi maa laa yanfa'uhum wa laa yadurruhum; wa kaanal kaafiru 'alaa Rabbihee zaheeraa)
"और वे अल्लाह को छोड़कर ऐसी चीज़ों को पूजते हैं जो न नफ़ा दें न नुक़सान [100]; और काफ़िर तो अपने रब के मुक़ाबले में (शैतान का) मददगार है [101]!"
अल्लाह की इतनी वाज़ेह निशानियों और नेमतों के बावजूद मुशरिकीन ऐसे पत्थरों और बुतों के आगे सजदा करते हैं जो न उन्हें एक दाने का नफ़ा दे सकते हैं और न किसी आफ़त का नुक़सान पहुंचा सकते हैं।
अल्लाह ने इंसान को पैदा किया, रिज़्क़ दिया और हर नेमत बख़्शी, मगर काफ़िर अपने पैदा करने वाले रब की नाफ़रमानी करके उसके दुश्मन शैतान का मुआवीन और मददगार बन जाता है। यह इंसान की इंतिहाई एहसान-फ़रामोशी और ज़ुल्म है।
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