कुरान - 25:56 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
وَمَآ أَرۡسَلۡنَٰكَ إِلَّا مُبَشِّرٗا وَنَذِيرٗا

Transliteration: (Wa maa arsalnaaka illaa mubashshiranw wa nazeeraa)

और हमने आपको सिर्फ़ ख़ुशख़बरी सुनाने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है [102]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 56

"और हमने आपको सिर्फ़ ख़ुशख़बरी सुनाने वाला और डराने वाला बनाकर भेजा है [102]।"

[102] मन्सब-ए-रिसालत: बशीर और नज़ीर

हुज़ूर अक़दस ﷺ की आमद का मक़सद यह है कि जो लोग ईमान लाएं और नेक आमाल करें उन्हें जन्नत और रज़ा-ए-इलाही की बशारत (ख़ुशख़बरी) सुनाएं, और जो कुफ़्र व नाफ़रमानी का रास्ता चुनें उन्हें अल्लाह के ग़ज़ब और जहन्नम के अज़ाब से डराएं। अगर कोई बदबख़्त इसके बावजूद ईमान न लाए तो नबी पर कोई इल्ज़ाम नहीं।

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