कुरान - 25:58 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱلۡحَيِّ ٱلَّذِي لَا يَمُوتُ وَسَبِّحۡ بِحَمۡدِهِۦۚ وَكَفَىٰ بِهِۦ بِذُنُوبِ عِبَادِهِۦ خَبِيرًا

Transliteration: (Wa tawakkal 'alal Haiyil lazee laa yamootu wa sabbih bihamdih; wa kafaa bihee bizunoobi 'ibaadihee khabeeraa)

और उस हमेशा ज़िन्दा रहने वाले (अल-हय्य) पर भरोसा कीजिए जिसे कभी मौत नहीं आनी [104], और उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह बयान कीजिए; और वह अपने बंदों के गुनाहों से पूरी तरह बाख़बर होने के लिए काफ़ी है; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 58

"और उस हमेशा ज़िन्दा रहने वाले पर भरोसा कीजिए जिसे मौत नहीं आनी [104], और उसकी हम्द के साथ तस्बीह कीजिए; और वह बंदों के गुनाहों से बाख़बर होने के लिए काफ़ी है।"

[104] अल-हय्युल-क़य्यूम पर कामिल तवक्कुल

इंसानों और दुनियावी ताक़तों पर भरोसा करने वाला आख़िरकार मायूस होता है क्योंकि हर मख़्लूक़ फ़ानी है। भरोसा सिर्फ़ उस ज़ात पर होना चाहिए जो 'अल-हय्य' (सदा ज़िन्दा) है, जिसे न कभी मौत आ सकती है और न ज़वाल। नबी-ए-करीम ﷺ को हुक्म दिया गया कि काफ़िरों की साज़िशों के मुक़ाबले में सिर्फ़ अल्लाह पर तवक्कुल रखें और उसकी हम्द व तस्बीह में मश्ग़ूल रहें। अल्लाह मुजरिमों के हर अमल से बाख़बर है और उनका मुहासिबा फ़रमाएगा।

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