कुरान - 25:59 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ عَلَى ٱلۡعَرۡشِۖ ٱلرَّحۡمَٰنُ فَسۡـَٔلۡ بِهِۦ خَبِيرٗا

Transliteration: (Allazee khalaqas samaawaati wal arda wa maa bainahumaa fee sittati aiyaamin thumma stawaa 'alal 'Arsh; ar Rahmaanu fas'al bihee khabeeraa)

जिसने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उनके दरमियान है छह दिनों में पैदा फ़रमाया [105], फिर अर्श पर (अपनी शान के मुताबिक़) इस्तिवा फ़रमाया [106]; वह रहमान है, पस उसके बारे में किसी बाख़बर से दरयाफ़त करो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 59

"जिसने आसमानों और ज़मीन को छह दिनों में पैदा फ़रमाया [105], फिर अर्श पर इस्तिवा फ़रमाया [106]; वह रहमान है, पस किसी बाख़बर से पूछो।"

[105] छह दिनों में कायनात की तख़्लीक़ की हिकमत

अल्लाह तआला 'कुन' (हो जा) कहकर पलक झपकते ही पूरी कायनात पैदा करने पर क़ादिर था, लेकिन छह दिनों (इतवार से जुमा तक) में पैदा फ़रमाकर बन्दों को यह तालीम दी कि हर काम में सब्र, तदबीर और तर्तीब होनी चाहिए।

[106] 'इस्तिवा अलल-अर्श' और 'फ़स्अल बिही ख़बीरा'

'इस्तिवा अलल-अर्श' मुतशाबिहात में से है। अहले सुन्नत वल जमाअत का अक़ीदा है कि अल्लाह तआला अपनी शान के मुताबिक़ अर्श पर मुस्तवी (हुक्मरान) हुआ, वह जिस्म, मक़ाम और बैठने से पाक है। और 'फ़स्अल बिही ख़बीरा' से मुराद यह है कि अल्लाह तआला की ज़ात व सिफ़ात और उसकी मअरिफ़त के राज़ हुज़ूर अक़दस ﷺ से पूछो जो कायनात में सबसे बड़े बाख़बर और आलिम-ए-असरार हैं।

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