कुरान - 25:61 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
تَبَارَكَ ٱلَّذِي جَعَلَ فِي ٱلسَّمَآءِ بُرُوجٗا وَجَعَلَ فِيهَا سِرَٰجٗا وَقَمَرٗا مُّنِيرٗا

Transliteration: (Tabaarakal lazee ja'ala fis samaaa'i buroojanw wa ja'ala feehaa siraajanw wa qamaran muneeraa)

बहुत ही बा-बरकत है वह ज़ात जिसने आसमान में बुर्ज (सितारों के मदार) बनाए और उसमें एक (रोशन) चिराग़ (सूरज) और चमकता हुआ चांद बनाया [109]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 61

"बहुत ही बा-बरकत है वह ज़ात जिसने आसमान में बुर्ज बनाए और उसमें एक चिराग़ और चमकता हुआ चांद बनाया [109]!"

[109] आसमान के बारह बुर्ज, आफ़्ताब और माहताब की तख़्लीक़

अल्लाह तआला ने आसमान पर बारह बुर्ज (राशियाँ जैसे हमल, सौर वगैरह) मुक़र्रर फ़रमाए जिनमें सूरज, चाँद और सितारे अपने मुअय्यन मदार में गर्दिश करते हैं। सूरज को 'सिराज' (रोशन चिराग़) फ़रमाया जो खुद रोशनी और हरारत का मम्बा है, और चाँद को 'क़मरन मुनीरा' फ़रमाया जो नूरानी है और रात की तारीकी में ठंडी और सुकून-बख़्श रोशनी देता है। यह अज़ीम निज़ाम अल्लाह की कामिल क़ुदरत और हिकमत का खुला सबूत है।

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