कुरान - 25:62 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
وَهُوَ ٱلَّذِي جَعَلَ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ خِلۡفَةٗ لِّمَنۡ أَرَادَ أَن يَذَّكَّرَ أَوۡ أَرَادَ شُكُورٗا

Transliteration: (Wa huwal lazee ja'alal laila wannahaara khilfatan liman araada 'any yazzakkara aw araadaa shukooraa)

और वही है जिसने रात और दिन को एक-दूसरे के पीछे आने वाला (बदलने वाला) बनाया [110], उस शख़्स के लिए जो नसीहत हासिल करना चाहे या शुक्रगुज़ारी का इरादा रखे [111]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 62

"और वही है जिसने रात और दिन को एक-दूसरे का जानशीन बनाया [110], उसके लिए जो नसीहत ले या शुक्रगुज़ारी चाहे [111]।"

[110] लैल व नहार की मुसलसल गर्दिश

अल्लाह तआला ने रात और दिन को एक-दूसरे के पीछे आने वाला (ख़िल्फ़तन) बनाया। जब रात जाती है तो दिन आ जाता है, और दिन रुख़्सत होता है तो रात छा जाती है। अगर किसी बंदे का कोई नेक अमल या इबादत दिन में छूट जाए तो वह रात में उसकी तलाफ़ी (क़ज़ा) कर सकता है, और जो रात में रह जाए वह दिन में पूरा कर सकता है।

[111] अहले-बसीरत के लिए ज़िक्र और शुक्र का मवाक़ा

यह तग़य्युर और मुसलसल निज़ाम उन लोगों के लिए अज़ीम नेमत है जो अपने रब की क़ुदरत से नसीहत हासिल करना चाहते हैं और उसकी नेमतों का शुक्रगुज़ार बंदा बनना चाहते हैं।

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