Transliteration: (Wallazeena yabeetoona li Rabbihim sujjadanw wa qiyaamaa)
"और जो अपने रब के हुज़ूर रातें गुज़ारते हैं सज्दे और क़ियाम की हालत में [114]।"
'इबादुर-रहमान' की दूसरी अज़ीम सिफ़त यह है कि जब दुनिया गहरी नींद सो रही होती है, तब वे अपने बिस्तरों को छोड़कर अपने रब के हुज़ूर नमाज़-ए-तहज्जुद में खड़े होते हैं। वे अपनी रातों को सज्दों और क़ियाम में गुज़ारते हैं। दिन में उनका किरदार बेहतरीन होता है और रातें इबादत-ए-इलाही में बसर होती हैं।
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