कुरान - 25:64 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
وَٱلَّذِينَ يَبِيتُونَ لِرَبِّهِمۡ سُجَّدٗا وَقِيَٰمٗا

Transliteration: (Wallazeena yabeetoona li Rabbihim sujjadanw wa qiyaamaa)

और जो अपने रब के हुज़ूर इस हाल में रातें गुज़ारते हैं कि वे सज्दे में होते हैं और क़ियाम में खड़े होते हैं [114]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 64

"और जो अपने रब के हुज़ूर रातें गुज़ारते हैं सज्दे और क़ियाम की हालत में [114]।"

[114] शब-बेदारी और नमाज़-ए-तहज्जुद की पाबंदी

'इबादुर-रहमान' की दूसरी अज़ीम सिफ़त यह है कि जब दुनिया गहरी नींद सो रही होती है, तब वे अपने बिस्तरों को छोड़कर अपने रब के हुज़ूर नमाज़-ए-तहज्जुद में खड़े होते हैं। वे अपनी रातों को सज्दों और क़ियाम में गुज़ारते हैं। दिन में उनका किरदार बेहतरीन होता है और रातें इबादत-ए-इलाही में बसर होती हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now