Transliteration: (Innahaa saaa'at mustaqarranw wa muqaamaa)
"बेशक वह बहुत ही बुरा ठिकाना और ठहरने की जगह है [116]!"
दोज़ख़ दायमी रहने के एतबार से भी बदतरीन जगह है (मुस्तक़र्रन) और थोड़ी देर के क़ियाम के एतबार से भी इंतिहाई ख़ौफ़नाक और अज़ाब-देह मक़ाम है (मुक़ामन)। अक्ल का तकाज़ा यही है कि इंसान ऐसे बुरे ठिकाने से बचने की हर मुमकिन कोशिश करे।
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