कुरान - 25:66 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
إِنَّهَا سَآءَتۡ مُسۡتَقَرّٗا وَمُقَامٗا

Transliteration: (Innahaa saaa'at mustaqarranw wa muqaamaa)

बेशक वह बहुत ही बुरा ठिकाना और ठहरने की जगह है [116]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 66

"बेशक वह बहुत ही बुरा ठिकाना और ठहरने की जगह है [116]!"

[116] जहन्नम की बदतरीन रिहाइश

दोज़ख़ दायमी रहने के एतबार से भी बदतरीन जगह है (मुस्तक़र्रन) और थोड़ी देर के क़ियाम के एतबार से भी इंतिहाई ख़ौफ़नाक और अज़ाब-देह मक़ाम है (मुक़ामन)। अक्ल का तकाज़ा यही है कि इंसान ऐसे बुरे ठिकाने से बचने की हर मुमकिन कोशिश करे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now