कुरान - 25:67 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
وَٱلَّذِينَ إِذَآ أَنفَقُواْ لَمۡ يُسۡرِفُواْ وَلَمۡ يَقۡتُرُواْ وَكَانَ بَيۡنَ ذَٰلِكَ قَوَامٗا

Transliteration: (Wallazeena izaaa anfaqoo lam yusrifoo wa lam yaqturoo wa kaana baina zaalika qawaamaa)

और जो लोग जब ख़र्च करते हैं तो न तो फ़िज़ूलख़र्ची करते हैं [117] और न ही तंगी करते हैं, बल्कि उनका ख़र्च इन दोनों के दरमियान एतिदाल (संतुलन) पर होता है; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 67

"और जो जब ख़र्च करते हैं तो न फ़िज़ूलख़र्ची करते हैं [117] न तंगी, बल्कि इन दोनों के दरमियान एतिदाल पर रहते हैं।"

[117] माल ख़र्च करने में मियाना-रवी (एतिदाल)

नेक बन्दों की चौथी सिफ़त माली मुआमलात में एतिदाल है। वे नाजायज़ कामों, रियाकारी और बेजा फ़िज़ूलख़र्ची (इसराफ़) में माल नहीं उड़ाते, और न ही अपने अहलो-अयाल और नेक कामों में कंजूसी व बुख़्ल (इफ़्तार) करते हैं। बल्कि हलाल तरीक़े से कमाकर अपनी हैसियत के मुताबिक़ मियाना-रवी (बीच का रास्ता) इख़्तियार करते हैं।

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