कुरान - 25:69 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

69
يُضَٰعَفۡ لَهُ ٱلۡعَذَابُ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَيَخۡلُدۡ فِيهِۦ مُهَانًا

Transliteration: (Yudaa'af lahul 'azaabu Yawmal Qiyaamati wa yakhlud feehee muhaanaa)

क़ियामत के दिन उसके लिए अज़ाब दोगुना कर दिया जाएगा और वह उसमें हमेशा ज़लील व ख़्वार होकर रहेगा [120]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 69 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 69

"क़ियामत के दिन उसके लिए अज़ाब दोगुना कर दिया जाएगा और वह उसमें हमेशा ज़लील होकर रहेगा [120]।"

[120] मुशरिकीन और मुजरिमों के लिए मुज़ाअफ़ अज़ाब

जो लोग शिर्क के साथ-साथ क़त्ल और बदकारी जैसे गुनाहों में मुब्तला रहे, उनके लिए क़ियामत के दिन अज़ाब दर अज़ाब (दोगुना) कर दिया जाएगा—एक कुफ़्र का अज़ाब और दूसरा इन कबीरा गुनाहों का अज़ाब। और वे हमेशा-हमेशा जहन्नम में ज़िल्लत व रुस्वाई की हालत में पड़े रहेंगे।

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