कुरान - 25:71 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
وَمَن تَابَ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَإِنَّهُۥ يَتُوبُ إِلَى ٱللَّهِ مَتَابٗا

Transliteration: (Wa man taaba wa 'amila saalihan fa innahoo yatoobu ilal laahi mataabaa)

और जो शख़्स तौबा करता है [124] और नेक अमल करता है, तो बेशक वह हक़ीक़त में अल्लाह की तरफ़ ऐसा रुजूअ करता है जैसा रुजूअ करने का हक़ है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 71

"और जो तौबा करता है [124] और नेक अमल करता है, तो बेशक वह अल्लाह की तरफ़ सच्चा रुजूअ करता है।"

[124] तौबा-ए-नसूस और अमली इस्लाह

सच्ची तौबा सिर्फ़ ज़बान से 'अस्तग़फ़िरुल्लाह' कहने का नाम नहीं, बल्कि गुनाहों पर दिल से शर्मिंदा होना, आइंदा न करने का पुख़्ता इरादा करना और अपनी अमली ज़िन्दगी में नेकियों को अपनाना है। जो ऐसा करता है, वह हक़ीक़त में अपने रब की रज़ा की तरफ़ रुजूअ करता है और अल्लाह ऐसे बन्दों से बेपनाह मुहब्बत फ़रमाता है।

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