कुरान - 25:72 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

72
وَٱلَّذِينَ لَا يَشۡهَدُونَ ٱلزُّورَ وَإِذَا مَرُّواْ بِٱللَّغۡوِ مَرُّواْ كِرَامٗا

Transliteration: (Wallazeena laa yash hadoonaz zoora wa izaa marroo billaghwi marroo kiraamaa)

और जो लोग झूठी गवाही नहीं देते [125], और जब वे किसी बेहूदा (लग़्व) बात के पास से गुज़रते हैं तो बा-वक़ार होकर गुज़र जाते हैं [126]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 72 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 72

"और जो झूठी गवाही नहीं देते [125], और जब बेहूदा बात के पास से गुज़रते हैं तो बा-वक़ार गुज़र जाते हैं [126];"

[125] 'ज़ूर' यानी झूठी गवाही और बातिल मजालिस से परहेज़

'इबादुर-रहमान' की छठी सिफ़त यह है कि वे कभी झूठी गवाही नहीं देते। 'ज़ूर' में हर क़िस्म का झूठ, बोहतान, मुशरिकाना मेले-ठेले, गाने-बाजे और बेहूदा महफ़िलें शामिल हैं। वे इन तमाम गुनाह की जगहों से अपने आप को दूर रखते हैं।

[126] लग़्व बातों से बा-वक़ार किनाराकशी

अगर कभी राह चलते उनका गुज़र किसी बेहूदा मन्ज़र या फ़ुज़ूल बातों के पास से हो जाए, तो वे उसमें दिलचस्पी नहीं लेते बल्कि अपनी इज़्ज़त और दीनी वक़ार को बचाते हुए ख़ामोशी से आगे बढ़ जाते हैं।

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