कुरान - 25:73 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

73
وَٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِّرُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمۡ لَمۡ يَخِرُّواْ عَلَيۡهَا صُمّٗا وَعُمۡيَانٗا

Transliteration: (Wallazeena izaa zukkiroo bi Aayaati Rabbihim lam yakhirroo 'alaihaa summanw wa'umyaanaa)

और जो ऐसे लोग हैं कि जब उन्हें उनके रब की आयतें याद दिलाई जाती हैं, तो वे उन पर अंधे और बहरे होकर नहीं गिरते [127]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 73 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 73

"और जब उन्हें उनके रब की आयतें याद दिलाई जाती हैं, तो उन पर अंधे और बहरे होकर नहीं गिरते [127];"

[127] क़ुरआनी नसीहत पर मुकम्मल तवज्जो और दिल की बीनाई

उनकी सातवीं सिफ़त यह है कि जब उनके सामने क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत की जाती है या अल्लाह के अहकाम सुनाए जाते हैं, तो वे मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों की तरह अंधे और बहरे बनकर बेपरवाह नहीं रहते। बल्कि वे पूरे होश-ओ-हवास, दिल की हाज़िरी और रोते हुए कानों से सुनते हैं, नसीहत क़बूल करते हैं और फ़ौरन उस पर अमल करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

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