कुरान - 25:75 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
أُوْلَـٰٓئِكَ يُجۡزَوۡنَ ٱلۡغُرۡفَةَ بِمَا صَبَرُواْ وَيُلَقَّوۡنَ فِيهَا تَحِيَّةٗ وَسَلَٰمًا

Transliteration: (Ulaaa'ika yujzawnal ghurfata bimaa sabaroo wa yulaqqawna feehaa tahiyyatanw wa salaamaa)

यही वे लोग हैं जिन्हें उनके सब्र के बदले जन्नत का सबसे बुलन्द मक़ाम (गुर्फ़ा) अता किया जाएगा [130], और वहाँ उनका इस्तक़बाल दुआ और सलाम के साथ किया जाएगा [131]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 75

"यही वे हैं जिन्हें सब्र के बदले 'गुर्फ़ा' (बुलन्द महल) दिया जाएगा [130], और वहाँ दुआ व सलाम से इस्तक़बाल होगा [131];"

[130] 'अल-गुर्फ़ा' यानी जन्नत के आला तरीन महल

जिन बन्दों के अंदर ये तमाम औसाफ़ पाए जाएंगे, उन्हें दुनिया में नफ़्स और शैतान के मुक़ाबले में सब्र करने, इबादत की मशक़्क़त झेलने और मुसीबतों पर साबित-क़दम रहने के बदले जन्नतुल-फ़िरदौस के सबसे आला, बुलन्द और रौशन महलात ('गुर्फ़ा') अता फ़रमाए जाएंगे।

[131] फ़रिश्तों की तरफ़ से सलाम और मुबारकबाद

जन्नत में दाखिल होते वक़्त रहमत के फ़रिश्ते हर दरवाज़े से उनके इस्तक़बाल के लिए आएंगे और अर्ज़ करेंगे: 'सलामुन अलैकुम बिमा सबर्तुम'—तुम पर सलामती हो तुम्हारे सब्र के बदले, पस आख़िरत का क्या ही ख़ूब घर है!

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