कुरान - 25:74 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
وَٱلَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا هَبۡ لَنَا مِنۡ أَزۡوَٰجِنَا وَذُرِّيَّـٰتِنَا قُرَّةَ أَعۡيُنٖ وَٱجۡعَلۡنَا لِلۡمُتَّقِينَ إِمَامًا

Transliteration: (Wallazeena yaqooloona Rabbanaa hab lanaa min azwaajinaa wa zurriyaatinaa qurrata a'yuninw waj 'alnaa lilmuttaqeena Imaamaa)

और जो यह दुआ करते हैं, 'ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और हमारी औलाद से आंखों की ठंडक अता फ़रमा [128], और हमें परहेज़गारों का इमाम (पेशवा) बना दे [129]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 74

"और जो दुआ करते हैं, 'ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और औलाद से आँखों की ठंडक दे [128], और हमें मुत्तक़ियों का इमाम बना दे [129]!'"

[128] नेक बीवी और सालेह औलाद: आँखों की ठंडक (क़ुर्रतुल-अयुन)

उनकी आठवीं सिफ़त अपने अहलो-अयाल के लिए यह जामेअ दुआ है। मोमिन के लिए बीवी और बच्चों की तरफ़ से अस्ल आँखों की ठंडक यह है कि वे अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के फ़रमाबरदार हों, नमाज़ों की पाबंदी करें और हयादार ज़िन्दगी गुज़ारें। गुनाहगार औलाद दिल का नासूर है और नेक औलाद दुनिया व आख़िरत की ठंडक है।

[129] तक़वा और नेकी में पेशवाई की तमन्ना

वे यह भी दुआ करते हैं कि ऐ अल्लाह! हमें नेकी, तक़वा और ख़ैर के कामों में मुत्तक़ी लोगों का पेशवा और रहनुमा बना दे, ताकि लोग हमारे नक़्शे-क़दम पर चलकर दीन सीखें। यह दुनियावी हुकूमत की तलब नहीं बल्कि दीन की सरबुलन्दी की आरज़ू है।

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