कुरान - 25:70 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
إِلَّا مَن تَابَ وَءَامَنَ وَعَمِلَ عَمَلٗا صَٰلِحٗا فَأُوْلَـٰٓئِكَ يُبَدِّلُ ٱللَّهُ سَيِّـَٔاتِهِمۡ حَسَنَٰتٖۗ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورٗا رَّحِيمٗا

Transliteration: (Illaa man taaba wa 'aamana wa 'amila 'amalan saalihan fa ulaaa'ika yubad dilul laahu saiyi aatihim hasanaat; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheemaa)

मगर जो तौबा करे [121] और ईमान लाए [122] और नेक काम करे [123]; तो अल्लाह ऐसे लोगों की बुराइयों को नेकियों से बदल देगा; और अल्लाह बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 70

"मगर जो तौबा करे [121] और ईमान लाए [122] और नेक काम करे [123]; तो अल्लाह बुराइयों को नेकियों से बदल देगा; और अल्लाह बख़्शने वाला मेहरबान है।"

[121-123] सच्ची तौबा और बुराइयों का नेकियों में तब्दील होना (तब्दील-ए-सय्यिआत)

अल्लाह तआला की रहमत की कोई इंतिहा नहीं! अगर कोई इंसान शिर्क और बड़े से बड़े गुनाहों के बाद भी मौत से पहले सच्चे दिल से तौबा कर ले, ईमान ले आए और अपनी आइंदा ज़िन्दगी को नेक आमाल में गुज़ारने लगे, तो अल्लाह न सिर्फ़ उसके पिछले तमाम गुनाह माफ़ फ़रमा देगा, बल्कि अपने लुत्फ़-ओ-करम से उसके नाम-ए-आमाल में गुनाहों की जगह नेकियों का सवाब लिख देगा। यह अल्लाह तआला का अज़ीम फ़ज़्ल और मग़फ़िरत है।

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