कुरान - 25:65 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
وَٱلَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا ٱصۡرِفۡ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَۖ إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا

Transliteration: (Wallazeena yaqooloona Rabbanas rif 'annaa 'azaaba Jahannama inna 'azaabahaa kaana gharaamaa)

और जो अर्ज़ करते हैं, 'ऐ हमारे रब! हमसे जहन्नम का अज़ाब फेर दे; बेशक उसका अज़ाब चिमट जाने वाला (लाज़िम) है [115]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 65

"और जो कहते हैं, 'ऐ हमारे रब! हमसे जहन्नम का अज़ाब फेर दे; बेशक उसका अज़ाब चिमट जाने वाला है [115]।"

[115] इबादत के बावजूद ख़ौफ़-ए-ख़ुदा और जहन्नम से पनाह

उनकी तीसरी सिफ़त यह है कि रात-दिन इबादत व रियाज़त करने के बावजूद वे अपने आमाल पर नाज़ नहीं करते, बल्कि अल्लाह के जलाल और अज़ाब से डरते हैं और रो-रोकर दुआ मांगते हैं: ऐ हमारे रब! हमें जहन्नम के अज़ाब से महफ़ूज़ रख। 'ग़रामा' का मतलब यह है कि दोज़ख़ का अज़ाब ऐसा है जो मुजरिम से हमेशा के लिए चिमट जाएगा और कभी जुदा नहीं होगा।

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