कुरान - 25:54 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
وَهُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ مِنَ ٱلۡمَآءِ بَشَرٗا فَجَعَلَهُۥ نَسَبٗا وَصِهۡرٗاۗ وَكَانَ رَبُّكَ قَدِيرٗا

Transliteration: (Wa Huwal lazee khalaqa minal maaa'i basharan fa ja'alahoo nasaban wa sihraa; wa kaana Rabbuka Qadeeraa)

और वही है जिसने इंसान को पानी से पैदा किया, फिर उसके लिए नसब और ससुराल के रिश्ते बना दिए [98]; और आपका रब बड़ी क़ुदरत वाला है [99]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 54

"और वही है जिसने इंसान को पानी से पैदा किया, फिर नसब और ससुराल के रिश्ते बनाए [98]; और आपका रब बड़ी क़ुदरत वाला है [99]।"

[98] पानी (नुत्फ़े) से तख़्लीक़ और नसब व सिहर के रिश्ते

अल्लाह तआला ने एक हक़ीर पानी की बूंद (नुत्फ़ा) से इंसान जैसा बा-शुऊर व हसीन वुजूद पैदा फ़रमाया। फिर इंसानी समाज की बक़ा के लिए दो तरह के रिश्ते क़ायम किए: एक 'नसब' यानी ख़ून और नस्ल के रिश्ते (जैसे बाप, बेटा, भाई, चचा), और दूसरा 'सिहर' यानी निकाह के ज़रिए बनने वाले ससुराल के रिश्ते (जैसे सास, ससुर, साला, दामाद)। इन रिश्तों से इंसानी मुहब्बत और तहज़ीब का निज़ाम चलता है।

[99] अल्लाह की कामिल कु़दरत

एक ही तरह के पानी से मर्द और औरत दोनों का पैदा होना और उनसे मुतअद्दिद ख़ानदानों और क़बीलों का वजूद में आना अल्लाह की अज़ीम कु़दरत और हिकमत का खुला सबूत है।

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