कुरान - 22:13 सूरह अल-हज् अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
يَدۡعُواْ لَمَن ضَرُّهُۥٓ أَقۡرَبُ مِن نَّفۡعِهِۦۚ لَبِئۡسَ ٱلۡمَوۡلَىٰ وَلَبِئۡسَ ٱلۡعَشِيرُ

Transliteration: (Yad'oo laman darruhooo aqrabu min naf'ih; labi'salmawlaa wa labi'sal 'asheer)

13. वह ऐसे को पुकारता है जिसका नुक़्सान उसके नफ़े से ज़्यादा क़रीब है [32]; क्या ही बुरा मददगार है और क्या ही बुरा साथी है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हज् आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हज्ज — आयत 13 की तफ़सीर

"वह ऐसे को पुकारता है जिसका नुक़्सान उसके नफ़े से ज़्यादा क़रीब है [32]; क्या ही बुरा मददगार है और क्या ही बुरा साथी है!"

[32] बुतों की इबादत सरासर नुक़्सान

इन झूठे माबूदों से नफ़े की उम्मीद तो ख़ाम ख़याली है, जबकि इनकी इबादत का नुक़्सान (दुनिया की रुस्वाई और जहन्नम की दायमी आग) बिल्कुल क़तई और क़रीब है। बुत और शैतान बदतरीन मददगार और निहायत बुरे साथी हैं।

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