कुरान - 49:5 सूरह अल-हुजुरात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
وَلَوۡ أَنَّهُمۡ صَبَرُواْ حَتَّىٰ تَخۡرُجَ إِلَيۡهِمۡ لَكَانَ خَيۡرٗا لَّهُمۡۚ وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Wa law annahum sabaroo hatta takhruja ilaihim lakaana khairal lahum; wallaahu Ghafoorur Raheem)

और अगर वे सब्र करते यहाँ तक कि आप ख़ुद उनके पास बाहर तशरीफ़ लाते [9], तो यह उनके लिए बहुत बेहतर होता। और अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है [10]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हुजुरात आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हुजुरात तफ़सीर - आयत 5

"और अगर वे सब्र करते यहाँ तक कि आप ख़ुद उनके पास बाहर तशरीफ़ लाते [9], तो यह उनके लिए बहुत बेहतर होता। और अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है [10]!"


[9] नबी ﷺ के आराम और वक़्त का एहतिराम

उन्हें तालीम दी गई कि जब हुज़ूर ﷺ अपने घर में आराम फ़रमा रहे हों, तो बाहर खड़े होकर इंतज़ार करना चाहिए ताकि आप अपनी ख़ुशी से जब बाहर तशरीफ़ लाएँ तब बात की जाए। नबी के वक़्त और आराम में ख़लल डालना मना है।


[10] तौबा और मग़फ़िरत

अगर वे अपनी इस नादानी पर तौबा करें और आइंदा के लिए बारगाह-ए-रिसालत का कामिल अदब सीख लें, तो अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है।

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