कुरान - 49:7 सूरह अल-हुजुरात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ فِيكُمۡ رَسُولَ ٱللَّهِۚ لَوۡ يُطِيعُكُمۡ فِي كَثِيرٖ مِّنَ ٱلۡأَمۡرِ لَعَنِتُّمۡ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ حَبَّبَ إِلَيۡكُمُ ٱلۡإِيمَٰنَ وَزَيَّنَهُۥ فِي قُلُوبِكُمۡ وَكَرَّهَ إِلَيۡكُمُ ٱلۡكُفۡرَ وَٱلۡفُسُوقَ وَٱلۡعِصۡيَانَۚ أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلرَّـٰشِدُونَ

Transliteration: (Wa'lamooo anna feekum Rasoolal laah; law yutee'ukum fee kaseerim minal amrila'anittum wa laakinnal laaha habbaba ilaikumul eemaana wa zaiyanahoo fee quloobikum wa karraha ilaikumul kufra walfusooqa wal'isyaan; ulaaaika humur raashidoon)

और जान लो कि तुम में अल्लाह के रसूल मौजूद हैं [15]! अगर वे बहुत सी बातों में तुम्हारा कहा मानें [16], तो तुम ज़रूर मुश्किल में पड़ जाओ। लेकिन अल्लाह ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दी और उसे तुम्हारे दिलों में ख़ूबसूरत बना दिया [17], और कुफ़्र, गुनाह और नाफ़रमानी से तुम्हें नफ़रत दिला दी [18]। यही लोग सीधे रास्ते पर हैं [19]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हुजुरात आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हुजुरात तफ़सीर - आयत 7

"और जान लो कि तुम में अल्लाह के रसूल मौजूद हैं [15]! अगर वे बहुत सी बातों में तुम्हारा कहा मानें [16], तो तुम ज़रूर मुश्किल में पड़ जाओ। लेकिन अल्लाह ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दी और उसे तुम्हारे दिलों में ख़ूबसूरत बना दिया [17], और कुफ़्र, गुनाह और नाफ़रमानी से तुम्हें नफ़रत दिला दी [18]। यही लोग सीधे रास्ते पर हैं [19]!"


[15] 'फ़ीकुम रसूलुल्लाह' — हुज़ूर ﷺ की अज़ीम मौजूदगी

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि तुम्हारे दरमियान रसूलुल्लाह ﷺ की मुबारक ज़ात मौजूद है जो वही-ए-इलाही और हिकमत के सरचश्मा हैं। उनकी मौजूदगी तुम्हारे लिए सबसे बड़ी नेमत और सलामती का ज़रिया है।


[16] रसूल की राय और हिकमत की पैरवी लाज़िमी है

तुम अपनी राय या जज़्बात को नबी ﷺ पर थोपने की कोशिश न करो। अगर नबी तुम्हारी आम राय पर अमल करने लगें, तो दुनिया और आख़िरत दोनों में तुम बड़ी मुसीबतों और ख़राबी में फँस जाओगे। नबी का हर फ़ैसला हिकमत और इलाही हिदायत पर आधारित होता है।


[17] [18] सहाबा किराम के दिलों की पाकीज़गी

अल्लाह तआला ने सहाबा किराम की अज़्मत बयान फ़रमाई कि अल्लाह ने उनके दिलों में ईमान की बेपनाह मोहब्बत डाल दी और उसे निहायत दिलकश बना दिया, और कुफ़्र, गुनाह (फ़िस्क़) और नाफ़रमानी (इस्यान) से उनके दिलों को नफ़रत अता फ़रमाई।


[19] 'उलाइका हुमुर राशिदून' (सच्चे हिदायत याफ़्ता)

अल्लाह ने गवाही दी कि हुज़ूर ﷺ के सहाबा ही सच्चे रास्ते पर चलने वाले और कामिल हिदायत याफ़्ता हैं।

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