कुरान - 49:18 सूरह अल-हुजुरात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ غَيۡبَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَٱللَّهُ بَصِيرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Innal laaha ya'lamu ghaibas samaawaati wal ard; wallaahu baseerum bimaa ta'maloon (section 2))

बेशक अल्लाह आसमानों और ज़मीन की तमाम छुपी हुई बातों (ग़ैब) को ख़ूब जानता है, और अल्लाह तुम्हारे सब आमाल को देख रहा है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हुजुरात आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हुजुरात तफ़सीर - आयत 18

"बेशक अल्लाह आसमानों और ज़मीन की तमाम छुपी हुई बातों (ग़ैब) को ख़ूब जानता है, और अल्लाह तुम्हारे सब आमाल को देख रहा है!"


अल्लाह का मुकम्मल इल्म-ए-ग़ैब और निगरानी

अल्लाह तआला ज़मीन व आसमान के तमाम पोशीदा भेदों, दिलों के इरादों और नीयतों की गहराइयों से पूरी तरह वाक़िफ़ है। कोई बात, अमल या हरकत उसकी नज़र से छुपी नहीं रह सकती। वह हर इंसान को उसके ईमान, इख़्लास और आमाल का पूरा-पूरा बदला अता फ़रमाएगा।

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