कुरान - 49:15 सूरह अल-हुजुरात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
إِنَّمَا ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ ثُمَّ لَمۡ يَرۡتَابُواْ وَجَٰهَدُواْ بِأَمۡوَٰلِهِمۡ وَأَنفُسِهِمۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۚ أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلصَّـٰدِقُونَ

Transliteration: (Innamal muu'minoonal lazeena aamanoo billaahi wa Rasoolihee summa lam yartaaboo wa jaahadoo biamwaalihim wa anfusihim fee sabeelil laah; ulaaaika humus saadiqoon)

सच्चे मोमिन तो बस वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए [46], फिर उन्होंने कभी कोई शक नहीं किया [47], और अपने मालों और अपनी जानों से अल्लाह के रास्ते में जिहाद किया। यही लोग (अपने दावे में) सच्चे हैं [48]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हुजुरात आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हुजुरात तफ़सीर - आयत 15

"सच्चे मोमिन तो बस वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए [46], फिर उन्होंने कभी कोई शक नहीं किया [47], और अपने मालों और अपनी जानों से अल्लाह के रास्ते में जिहाद किया। यही लोग (अपने दावे में) सच्चे हैं [48]!"


[46] कामिल ईमान की पहली शर्त

सच्चा ईमान वह है जिसमें अल्लाह तआला की वहदानियत और हुज़ूर मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की रिसालत व शान पर मुकम्मल और अटूट यक़ीन हो।


[47] शक व शुबहे से पूरी पाकीज़गी ('सुम्मा लम यर्ताबू')

मोमिन के दिल में कभी किसी दीनी अक़ीदे या रसूल ﷺ के फ़रमान पर कोई शक नहीं पैदा होता। उसका यक़ीन धूप की तरह रौशन और पहाड़ की तरह अटल रहता है। शक ईमान की ज़िद है।


[48] जान व माल की क़ुरबानी और सच्चाई की सनद

जब वक़्त आए तो अल्लाह और रसूल की मोहब्बत में अपना माल भी न्योछावर कर देना और अपनी जान भी कुर्बान कर देना—यही सिद्दीक़ीन और सच्चे मोमिनों (सहाबा किराम) का मक़ाम है। अल्लाह ने उन्हें 'अस्-सादिक़ून' (अपने दावे में बिल्कुल सच्चे) की सनद अता फ़रमाई।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now