Transliteration: (Qul atu'allimoonal laaha bideenikum wallaahu ya'lamu maa fis samaawaati wa maa fil ard; wallaahu bikulli shai'in 'Aleem)
"आप फ़रमा दीजिए: 'क्या तुम अल्लाह को अपना दीन सिखाते हो [49]?' जबकि अल्लाह जानता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है! और अल्लाह हर चीज़ का पूरा इल्म रखने वाला है!"
जब मुनाफ़िक़ बार-बार क़समें खाकर अपने ईमान का ढोंग रचाते थे, तो अल्लाह ने फ़रमाया कि क्या तुम अल्लाह को अपने दिल का हाल बताना चाहते हो? अल्लाह तो ज़मीन व आसमान के हर ज़र्रे और हर भेद से पूरी तरह बाख़बर है।
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ की बारगाह में अपनी सच्चाई जताना हक़ीक़त में अल्लाह की बारगाह में जताना है, क्योंकि रसूल अल्लाह के कामिल मज़हर हैं।
हज़रत मौलाना रूमी रहमतुल्लाह अलैह का इरशाद:
"अगर तू चाहता है कि तुझे अल्लाह की हमनशीनी (साथ) नसीब हो, तो अल्लाह के नेक व मुक़र्रब बंदों और उसके प्यारे रसूल की सोहबत इख़्तियार कर।"
रसूल का दीदार रब के नूर का आईना है, और रसूल की ताज़ीम ही रज़ा-ए-इलाही की कुंजी है।
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