कुरान - 49:4 सूरह अल-हुजुरात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُنَادُونَكَ مِن وَرَآءِ ٱلۡحُجُرَٰتِ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Innal lazeena yunaadoo naka minw waraaa'il hujuraati aksaruhum laa ya'qiloon)

बेशक जो लोग आपको हुजरों (कमरों) के बाहर से पुकारते हैं, उनमें से अक्सर बेअक़्ल हैं [8]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हुजुरात आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हुजुरात तफ़सीर - आयत 4

"बेशक जो लोग आपको हुजरों (कमरों) के बाहर से पुकारते हैं, उनमें से अक्सर बेअक़्ल हैं [8]!"


[8] बनू तमीम के देहातियों की बेअदबी और कुरआनी डाँट

यह आयत क़बीला बनू तमीम के एक वफ़्द के बारे में नाज़िल हुई। वे दोपहर के वक़्त मदीना आए जब हुज़ूर अकरम ﷺ अपने मुबारक हुजरे में आराम फ़रमा रहे थे। उन बद्दूओं ने हुजरों की दीवार के पीछे से बेअदबी के साथ आवाज़ें लगानी शुरू कीं: "ऐ मुहम्मद! बाहर हमारे पास निकलिए!"

अल्लाह तआला को अपने प्यारे महबूब ﷺ की यह बेअदबी और तकलीफ़ इतनी नागवार गुज़री कि उसने आसमान से आयत नाज़िल फ़रमाकर उन लोगों को 'ला यअ़क़िलून' (बेअक़्ल और नासमझ) क़रार दिया। इससे साबित हुआ कि जो नबी का अदब नहीं जानता, वह अक़्ल की दौलत से महरूम है।

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