कुरान - 3:103 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
وَٱعۡتَصِمُواْ بِحَبۡلِ ٱللَّهِ جَمِيعٗا وَلَا تَفَرَّقُواْۚ وَٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذۡ كُنتُمۡ أَعۡدَآءٗ فَأَلَّفَ بَيۡنَ قُلُوبِكُمۡ فَأَصۡبَحۡتُم بِنِعۡمَتِهِۦٓ إِخۡوَٰنٗا وَكُنتُمۡ عَلَىٰ شَفَا حُفۡرَةٖ مِّنَ ٱلنَّارِ فَأَنقَذَكُم مِّنۡهَاۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تَهۡتَدُونَ

Transliteration: (Wa'tasimoo bi Hablil laahi jamee'anw wa laa tafarraqoo; wazkuroo ni'matal laahi alaikum iz kuntum a'daaa'an fa allafa baina quloobikum fa asbah tum bini'matiheee ikhwaananw wa kuntum 'alaa shafaa hufratim minan Naari fa anqazakum minhaa; kazaalika yubaiyinul laahu lakum aayaatihee la'allakum tahtadoon)

और तुम सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थामे रहो [228], और आपस में विभाजित न हो [229]। अल्लाह की उस नेमत को याद करो जो उसने तुम पर की [230], जब तुम एक-दूसरे के दुश्मन थे, फिर उसने तुम्हारे दिलों को जोड़ दिया, और तुम उसकी नेमत से भाई-भाई बन गए [231]। तुम आग के किनारे पर थे, तो उसने तुम्हें उससे बचा लिया [232]। इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को स्पष्ट करता है ताकि तुम हिदायत पा सको। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 103 की तफ़्सीर

 

✅ [228] अल्लाह की रस्सी और उसके अर्थ

अल्लाह की रस्सी से कुछ मुफ़स्सिरीन का मत है कि इसका अर्थ है रसूलुल्लाह ﷺ का पवित्र घराना, जिनसे मोहब्बत और इताअत हिदायत और निजात का ज़रिया है। दूसरे मत के अनुसार, यह रसूलुल्लाह ﷺ की ज़ात मुबारक है, जो एक रस्सी की तरह लोगों को गुमराही के कुएँ से निकाल कर हक़ की तरफ़ खींचती है। इसलिए, उनसे जुड़ना दरअसल हिदायत से जुड़ना है।

✅ [229] आज्ञाकारिता से मिलती है एकता

सच्ची एकता अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत पर आधारित होती है। अगर एकता इन सीमाओं से बाहर होती है, तो वह भटकाव का कारण बन जाती है। इस आयत से यह भी स्पष्ट होता है कि सहाबा के आपसी झगड़े किसी फिरकावारियत पर नहीं, बल्कि धार्मिक सोच के इख़्तिलाफ़ पर आधारित थे।

✅ [230] अल्लाह की नेमतों को याद करना

अल्लाह की दी हुई नेमतों को याद करना, और एक-दूसरे को उनकी याद दिलाना, एक बेहतरीन इबादत है। इससे शुक्र, विनम्रता और आपसी मेल-जोल को बढ़ावा मिलता है।

✅ [231] मोमिनों के बीच भाईचारा

रसूलुल्लाह ﷺ ने मोमिनों के बीच एक गहरा भाईचारा क़ायम किया। जैसे कोई बाप अपनी औलाद को एक कर सकता है लेकिन उनका भाई नहीं बन सकता, वैसे ही रसूल की बीवियाँ उम्मुल मोमिनीन हैं, लेकिन किसी की भाभी नहीं — यह दिखाता है कि इस्लामी भाईचारा आध्यात्मिक और शरई संबंधों पर आधारित है।

✅ [232] रसूल ﷺ: जहन्नम से निजात का ज़रिया

अल्लाह ने रसूलुल्लाह ﷺ को भेजकर इंसानियत को आग से बचा लिया, और उनकी इताअत का रास्ता दिखाया। इससे पता चलता है कि रसूल की सीरत और संदेश ही सबसे बड़ा निजात का ज़रिया है। उनके ज़रिए हلاकत से हिदायत की तरफ़ खींच लिया गया — यही अल्लाह की सबसे बड़ी रहमत है।

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