Transliteration: (Allazeena yazkuroonal laaha qiyaamanw-wa qu'oodanw-wa 'alaa juno obihim wa yatafakkaroona fee khalqis samaawaati wal ardi Rabbanaa maa khalaqta haaza baatilan Subhaanaka faqinaa 'azaaban Naar)
इस आयत में उन लोगों की तारीफ़ की गई है जो हर वक़्त अल्लाह को याद करते हैं। इससे पता चलता है कि सच्ची अक़्लमंदी और समझ सिर्फ़ दिमाग़ या दुनियावी कामयाबी में नहीं, बल्कि:
इस आयत में ज़िक्र के तीन हालात बताए गए हैं:
खड़े होकर, बैठे हुए, और लेटे हुए।
इससे सिखाया गया कि हर हालत में अल्लाह का ज़िक्र करना चाहिए — सेहत में या बीमारी में, चलने में या आराम में। ज़िक्र के लिए वुज़ू ज़रूरी नहीं, जिससे ये साबित होता है कि इबादत करना आसान और हर वक़्त मुमकिन है। बहुत से लोग आख़िरी वक़्त में भी कलिमा पढ़ते हैं, चाहे वुज़ू में न हों — ये ज़िंदगीभर के ज़िक्र की ताक़त को दिखाता है।
इन लोगों की दुआ का तरीका सिखाया गया है:
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