Transliteration: (Wa annal lazeena laa yu'minoona bil aakhirati a'tadnaa lahum 'azaaban aleemaa (section 1))
"और यह कि जो आख़िरत पर ईमान नहीं लाते [29], हमने उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है।"
आख़िरत के इनकार की तीन सूरतों का बयान है: (1) मुकम्मल इनकार — जैसे मुशरिक़ीन जो दोबारा ज़िंदा होने, हिसाब और जन्नत-दोज़ख़ को सिरे से नहीं मानते; (2) ग़लत अक़ीदा — जैसे बाज़ नसारा जो जन्नत को मानते हैं मगर उसकी जिस्मानी नेमतों के मुनकिर हैं; (3) जुज़्वी इनकार — जैसे वे लोग जो हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत और हश्र की हक़ीक़तों का इनकार करते हैं। इन तमाम मुनकिरीन के लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है।
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