कुरान - 17:10 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
وَأَنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ أَعۡتَدۡنَا لَهُمۡ عَذَابًا أَلِيمٗا

Transliteration: (Wa annal lazeena laa yu'minoona bil aakhirati a'tadnaa lahum 'azaaban aleemaa (section 1))

और यह कि जो आख़िरत पर ईमान नहीं लाते [29], हमने उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-इसरा (बनी इस्राईल) – आयत 10 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और यह कि जो आख़िरत पर ईमान नहीं लाते [29], हमने उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है।"

[29] आख़िरत के मुनकिरीन की तीन क़िस्में

आख़िरत के इनकार की तीन सूरतों का बयान है: (1) मुकम्मल इनकार — जैसे मुशरिक़ीन जो दोबारा ज़िंदा होने, हिसाब और जन्नत-दोज़ख़ को सिरे से नहीं मानते; (2) ग़लत अक़ीदा — जैसे बाज़ नसारा जो जन्नत को मानते हैं मगर उसकी जिस्मानी नेमतों के मुनकिर हैं; (3) जुज़्वी इनकार — जैसे वे लोग जो हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत और हश्र की हक़ीक़तों का इनकार करते हैं। इन तमाम मुनकिरीन के लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है।

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