कुरान - 17:31 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَلَا تَقۡتُلُوٓاْ أَوۡلَٰدَكُمۡ خَشۡيَةَ إِمۡلَٰقٖۖ نَّحۡنُ نَرۡزُقُهُمۡ وَإِيَّاكُمۡۚ إِنَّ قَتۡلَهُمۡ كَانَ خِطۡـٔٗا كَبِيرٗا

Transliteration: (Wa laa taqtulooo awlaadakum khashyata imlaaqin nahnu narzuquhum wa iyyaakum; inna qatlahum kaana khit 'an kabeeraa)

और अपनी संतानों को निर्धनता (कंगाली) के भय से क़त्ल न करो; हम उन्हें भी रोज़ी देते हैं और तुम्हें भी। निस्संदेह उनका क़त्ल करना बहुत बड़ा घोर अपराध (गुनाह-ए-कबीरा) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-इस्रा – आयत 31 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] बच्चों की हत्या और भ्रूण हत्या की सख़्त मनाही

जाहिलियत के लोग ग़रीबी और भुखमरी के डर से अपने बच्चों को मार डालते थे। अल्लाह ने फ़रमाया कि रिज़्क़ का मालिक इंसान नहीं बल्कि अल्लाह है। पैदा होने वाले बच्चे का रिज़्क़ अल्लाह के ज़िम्मे है, इसलिए आर्थिक तंगी के डर से बच्चों या गर्भ में पल रहे भ्रूण की हत्या करना बहुत बड़ा पाप है।

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