कुरान - 17:59 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
وَمَا مَنَعَنَآ أَن نُّرۡسِلَ بِٱلۡأٓيَٰتِ إِلَّآ أَن كَذَّبَ بِهَا ٱلۡأَوَّلُونَۚ وَءَاتَيۡنَا ثَمُودَ ٱلنَّاقَةَ مُبۡصِرَةٗ فَظَلَمُواْ بِهَاۚ وَمَا نُرۡسِلُ بِٱلۡأٓيَٰتِ إِلَّا تَخۡوِيفٗا

Transliteration: (Wa maa mana'anaaa an nursila bil aayaati illaaa an kazzaba bihal awwaloon; wa aatainaa Samoodan naaqata mubsiratan fazalamoo bihaa; wa maa nursilu bil aayaati illaa takhweefaa)

और हमें (मनचाही) निशानियां भेजने से किसी चीज़ ने नहीं रोका सिवाय इसके कि पूर्ववर्ती लोगों ने उन्हें झुठला दिया था; और हमने समूद को ऊंटनी का खुला चमत्कार दिया था, परन्तु उन्होंने उस पर ज़ुल्म किया; और हम निशानियां केवल डराने (सचेत करने) के लिए ही भेजते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-हिज्र / अल-इस्रा – आयत 59 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] मनचाहे चमत्कार न भेजने का ईश्वरीय रहस्य

मक्का वाले कहते थे कि सफ़ा पहाड़ को सोने का बना दिया जाए। अल्लाह ने फ़रमाया कि क़ौम-ए-समूद ने भी ऊंटनी की मांग की थी और जब उसे झुठलाया तो तुरंत पूरे अज़ाब से तबाह कर दिए गए। अल्लाह मक्का वालों को तुरंत अज़ाब से मिटाना नहीं चाहता था क्योंकि उनके वंश से ईमानदार उम्मत पैदा होनी थी।

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