कुरान - 17:60 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
وَإِذۡ قُلۡنَا لَكَ إِنَّ رَبَّكَ أَحَاطَ بِٱلنَّاسِۚ وَمَا جَعَلۡنَا ٱلرُّءۡيَا ٱلَّتِيٓ أَرَيۡنَٰكَ إِلَّا فِتۡنَةٗ لِّلنَّاسِ وَٱلشَّجَرَةَ ٱلۡمَلۡعُونَةَ فِي ٱلۡقُرۡءَانِۚ وَنُخَوِّفُهُمۡ فَمَا يَزِيدُهُمۡ إِلَّا طُغۡيَٰنٗا كَبِيرٗا

Transliteration: (Wa iz qulnaa laka inna rabbaka ahaata binnaas; wa maa ja'alnar ru'yal lateee arainaaka illaa fitnatal linnaasi washshajaratal mal'oonata fil quraan; wa nukhaw wifuhum famaa yazeeduhum illa tughyaanan kabeeraa (section 6))

और याद करो जब हमने आपसे कह दिया था कि, "निश्चय ही आपके रब ने लोगों को अपने घेरे में ले रखा है;" और हमने वह दृश्य जो आपको दिखाया था केवल लोगों की परीक्षा (आज़माइश) के लिए बनाया था, और उस वृक्ष को भी जिस पर क़ुरआन में लानत की गई है; और हम उन्हें डराते हैं, परन्तु यह उनके भारी विद्रोह (सरकशी) ही को बढ़ाता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-इस्रा – आयत 60 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] मेअराज का दृश्य और शजर-ए-मलऊना (ज़क़्क़ूम)

मेअराज की यात्रा का वाक़िआ कमज़ोर ईमान वालों और मुश्रिकों के लिए आज़माइश बन गया। इसी प्रकार क़ुरआन में उल्लिखित जहन्नम का कांटेदार थूहड़ का दरख़्त 'ज़क़्क़ूम' (शजर-ए-मलऊना) का जब ज़िक्र हुआ तो काफ़िर मज़ाक उड़ाने लगे कि आग में पेड़ कैसे उगेगा। हठधर्मी लोग हर ईश्वरीय चेतावनी से और अधिक सरकश हो जाते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now