कुरान - 45:10 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
مِّن وَرَآئِهِمۡ جَهَنَّمُۖ وَلَا يُغۡنِي عَنۡهُم مَّا كَسَبُواْ شَيۡـٔٗا وَلَا مَا ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَوۡلِيَآءَۖ وَلَهُمۡ عَذَابٌ عَظِيمٌ

Transliteration: (Minw waraaa'ihim Jahannamu wa laa yughnee 'anhum maa kasaboo shai'anw wa laa mat takhazoo min doonil laahi awliyaaa; wa lahum 'azaabun 'azeem)

उनके आगे जहन्नम [16] है, और जो कुछ उन्होंने कमाया वह उनके कुछ काम न आएगा [17], और न ही वे (काम आएंगे) जिन्हें उन्होंने अल्लाह के सिवा मददगार बना रखा था [18]; और उनके लिए बड़ा अज़ाब है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 10

"उनके आगे जहन्नम [16] है, और जो कुछ उन्होंने कमाया वह उनके कुछ काम न आएगा [17], और न ही वे (काम आएंगे) जिन्हें उन्होंने अल्लाह के सिवा मददगार बना रखा था [18]; और उनके लिए बड़ा अज़ाब है।"

[16] पहले क़ब्र फिर जहन्नम

यानी काफ़िरों को पहले क़ब्र के अज़ाब का सामना करना पड़ेगा, और उसके बाद उनके सामने जहन्नम की दहकती हुई आग होगी।

[17] काफ़िरों के आमाल और दौलत की बे-फ़ायदेगी (मोमिनों के लिए ईसाल-ए-सवाब की दलील)

काफ़िरों की दौलत, औलाद और उनके कमाए हुए काम उन्हें अज़ाब से बचाने में कोई काम न आएंगे। लेकिन इससे यह साबित होता है कि अल्लाह की रहमत से ये चीज़ें अहले-ईमान को ज़रूर नफ़ा पहुँचाती हैं। मोमिनों की औलाद उनके लिए मग़फ़िरत की दुआ करती है, उनके नाम पर किया गया सदक़ा व ख़ैरात (ईसाल-ए-सवाब) उन्हें क़ब्र व आख़िरत में फ़ायदा पहुँचाता है।

[18] बातिल माबूदों की नाकामी और औलिया की शफ़ाअत का सुबूत

काफ़िरों के बनाए हुए बुत या उनके पेशवा उस दिन उनकी कोई मदद नहीं कर सकेंगे। लेकिन इसके बरअक्स, मोमिनीन को अल्लाह के मक़बूल बंदों, अंबिया और औलिया की शफ़ाअत हासिल होगी। यह आयत काफ़िरों और उनके बातिल माबूदों के बारे में है, अहले-ईमान और औलिया-ए-किराम पर इसका इतलाक़ नहीं होता।

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