कुरान - 45:11 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
هَٰذَا هُدٗىۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمۡ لَهُمۡ عَذَابٞ مِّن رِّجۡزٍ أَلِيمٌ

Transliteration: (Haazaa hudaa; wal lazeena kafaroo bi aayaati Rabbihim lahum 'azaabum mir rijzin 'aleem (section 1))

यह (क़ुरआन) हिदायत [19] है; और जिन्होंने अपने रब की आयतों का इनकार किया, उनके लिए शदीद दर्दनाक [20] अज़ाब की सज़ा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 11

"यह (क़ुरआन) हिदायत [19] है; और जिन्होंने अपने रब की आयतों का इनकार किया, उनके लिए शदीद दर्दनाक [20] अज़ाब की सज़ा है।"

[19] क़ुरआन-ए-अज़ीम सरापा हिदायत

क़ुरआन-ए-पाक ऐसी मुकम्मल हिदायत है जो गुमराही की तमाम तारीकियों को मिटाकर इंसान को सीधे रास्ते पर लाती है। जो इसे थाम लेता है वह कभी गुमराह नहीं होता।

[20] शदीद तरीन दर्दनाक अज़ाब

जो लोग इन मुक़द्दस आयतों को झुटलाते हैं, उनके लिए दोज़ख़ में ऐसा अज़ाब होगा जो दर्द और शिद्दत में अपनी मिसाल आप होगा।

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