Transliteration: (Haazaa hudaa; wal lazeena kafaroo bi aayaati Rabbihim lahum 'azaabum mir rijzin 'aleem (section 1))
"यह (क़ुरआन) हिदायत [19] है; और जिन्होंने अपने रब की आयतों का इनकार किया, उनके लिए शदीद दर्दनाक [20] अज़ाब की सज़ा है।"
क़ुरआन-ए-पाक ऐसी मुकम्मल हिदायत है जो गुमराही की तमाम तारीकियों को मिटाकर इंसान को सीधे रास्ते पर लाती है। जो इसे थाम लेता है वह कभी गुमराह नहीं होता।
जो लोग इन मुक़द्दस आयतों को झुटलाते हैं, उनके लिए दोज़ख़ में ऐसा अज़ाब होगा जो दर्द और शिद्दत में अपनी मिसाल आप होगा।
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