Transliteration: (Allaahul lazee sahkhara lakumul bahra litajriyal fulku feehi bi amrihee wa litabtaghoo min fadlihee wa la'allakum tashkuroon)
"अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसख़्ख़र (ताबेदार) [21] कर दिया, ताकि उसकी कश्तियाँ उसके हुक्म से उसमें चलें, और ताकि तुम उसका फ़ज़्ल तलाश करो, और ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो।"
अल्लाह तआला ने समंदर के पानी में ऐसी क़ुव्वत रखी और हवाओं को इस तरह मुसख़्ख़र फ़रमाया कि भारी-भरकम जहाज़ और कश्तियाँ आसानी से तैरती हैं। इंसान इसके ज़रिए एक मुल्क से दूसरे मुल्क तिजारत करता है, मोती निकालता है और अल्लाह के फ़ज़्ल की तलाश करता है। इस पर बंदे को अपने रब का शुक्रगुज़ार होना चाहिए।
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