कुरान - 45:13 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَسَخَّرَ لَكُم مَّا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا مِّنۡهُۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ

Transliteration: (Wa sakhkhara lakum maa fis samaawaati wa maa fil ardi jamee'am minhu; inna feezaalika la Aayaatil liqawminy yatafakkaroon)

और उसने तुम्हारे लिए मुसख़्ख़र [22] कर दिया जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, सब कुछ अपनी तरफ़ से [23]। बेशक इसमें ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 13

"और उसने तुम्हारे लिए मुसख़्ख़र [22] कर दिया जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, सब कुछ अपनी तरफ़ से [23]। बेशक इसमें ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं।"

[22] कायनात की तसख़ीर और हुज़ूर ﷺ की शान-ए-महबूबियत

यहाँ एक बेहद अज़ीम हक़ीक़त बयान की गई है: अल्लाह तआला ने आसमानों और ज़मीन की तमाम मख़लूक़ात को हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के सदक़े में मुसख़्ख़र फ़रमाया है। हुज़ूर ﷺ के लिए यह पूरी कायनात बनाई गई, और आपके वसीले से अहले-ईमान को इसका फ़ायदा बख़्शा गया।

सूरज, चाँद, हवाएं, बारिश, दरिया और ज़मीन के ख़ज़ाने—सब इंसान की ख़िदमत में लगे हुए हैं ताकि वह अपने ख़ालिक़ को पहचाने और उसकी इबादत करे।

[23] खालिस अता-ए-इलाही

यह सब कुछ अल्लाह तआला का ख़ालिस इनाम और एहसान है, किसी इंसान का ज़ाती हक़ या कमाई नहीं। अक़्लमंद इंसान इन नेअमतों को देखकर मुनअिम-ए-हक़ीक़ी (अल्लाह) की बारगाह में सजदारिज़ हो जाता है।

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