कुरान - 45:15 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
مَنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا فَلِنَفۡسِهِۦۖ وَمَنۡ أَسَآءَ فَعَلَيۡهَاۖ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمۡ تُرۡجَعُونَ

Transliteration: (Man 'amila saalihan falinafsihee wa man asaaa'a fa'alaihaa summa ilaa Rabbikum turja'oon)

जो कोई नेक अमल करता है वह अपनी ही ज़ात के फ़ायदे के लिए [26] करता है, और जो कोई बुराई करता है उसका वबाल भी उसी पर है; फिर तुम सब अपने रब ही की तरफ़ लौटाए जाओगे [27]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 15

"जो कोई नेक अमल करता है वह अपनी ही ज़ात के फ़ायदे के लिए [26] करता है, और जो कोई बुराई करता है उसका वबाल भी उसी पर है; फिर तुम सब अपने रब ही की तरफ़ लौटाए जाओगे [27]।"

[26] आमाल का नफ़ा-ओ-नुक़सान इंसान की अपनी ज़ात के लिए

अल्लाह तआला बंदों की इबादत से बे-नियाज़ है। अगर सारी दुनिया नेक बन जाए तो अल्लाह की बादशाही में कोई इज़ाफ़ा नहीं होता, और अगर सब नाफ़रमान हो जाएं तो उसकी सल्तनत में कोई कमी नहीं आती। इंसान का हर नेक अमल उसी की अपनी नजात और बुलंदी का सबब है, और हर बुराई का वबाल उसी के सर पर है।

[27] बारगाह-ए-इलाही में वापसी

आख़िरकार हर जान को अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होना है जहाँ मुकम्मल इंसाफ़ के साथ जज़ा और सज़ा का फ़ैसला होगा।

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