कुरान - 45:16 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحُكۡمَ وَٱلنُّبُوَّةَ وَرَزَقۡنَٰهُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَٰتِ وَفَضَّلۡنَٰهُمۡ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa laqad aatainaa Baneee Israaa'eelal Kitaaba walhukma wan Nubuwwata wa razaqnaahum minat taiyibaati wa faddalnaahum;alal 'aalameen)

और बेशक हमने बनी इसराईल को किताब, और हुकूमत (हिकमत) [28], और नुबूवत अता फ़रमाई, और उन्हें पाकीज़ा चीज़ों में से रिज़्क़ [30] दिया, और उन्हें उस ज़माने के तमाम जहान वालों पर फ़ज़ीलत [31] बख़्शी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 16

"और बेशक हमने बनी इसराईल को किताब, और हुकूमत (हिकमत) [28], और नुबूवत अता फ़रमाई, और उन्हें पाकीज़ा चीज़ों में से रिज़्क़ [30] दिया, और उन्हें उस ज़माने के तमाम जहान वालों पर फ़ज़ीलत [31] बख़्शी।"

[28] बनी इसराईल पर तीन अज़ीम नेअमतें

अल्लाह तआला ने बनी इसराईल को तीन अज़ीम नेअमतों से नवाज़ा:

  1. आसमानी किताबें (तौरात, ज़बूर, इंजील)।

  2. सल्तनत व हुकूमत (हज़रत दाऊद और हज़रत सुलैमान अलैहिमुस्सलाम की अज़ीम हुकूमतें)।

  3. नुबूवत का सिलसिला जो सदियों तक उन्हीं की नस्ल में जारी रहा।

[30] पाकीज़ा रिज़्क़ (मन्न-ओ-सलवा)

सहरा-ए-तीह में उनके लिए मन्न-ओ-सलवा जैसी जन्नती ग़िज़ा उतारी गई और पाकीज़ा चश्मों का पानी अता किया गया।

[31] नस्बी शराफ़त बनाम ईमान की शर्त

इससे दो बुनियादी सबक़ हासिल होते हैं:

  1. अंबिया की औलाद होना मोमिन के लिए अज़ीम फ़ज़ीलत और शरफ़ की बात है।

  2. लेकिन काफ़िर और नाफ़रमान के लिए नबियों की नस्ल होना कोई नफ़ा नहीं देता। बनी इसराईल अंबिया की औलाद थे, मगर जब उन्होंने हुज़ूर अकरम ﷺ का इनकार किया तो वे लानत और ज़िल्लत के मुस्तहिक़ हो गए।

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