Transliteration: (Yasma'u Aayaatil laahi tutlaa 'alaihi summa yusirru mustakbiran ka-al lam yasma'haa fabashshirhu bi'azaabin aleem)
"जो अल्लाह की आयतें अपने सामने पढ़ी जाती सुनता है, फिर तकब्बुर करते हुए अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है [12], गोया उसने उन्हें सुना ही नहीं; तो आप उसे दर्दनाक [13] अज़ाब की खुशखबरी सुना दीजिए।"
यह उस बदबख़्त का हाल बयान करती है जो अल्लाह की आयतों को सुनने के बावजूद अपने कुफ़्र, हठधर्मी और घमंड को नहीं छोड़ता। इससे मालूम हुआ कि तकब्बुर और ज़िद इंसान के दिल पर ऐसा ताला लगा देते हैं जो उसे ईमान की दौलत से महरूम कर देता है।
ऐसे मुतक़ब्बिर को दुनिया में, मौत के वक़्त और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब की वईद सुनाई गई है। चुनांचे नज़र बिन हारिस को ग़ज़वा-ए-बदर में क़ैदी बनाकर ज़िल्लत के साथ क़त्ल किया गया (तफ़सीर रूहुल मआनी)।
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