कुरान - 45:8 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
يَسۡمَعُ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُسۡتَكۡبِرٗا كَأَن لَّمۡ يَسۡمَعۡهَاۖ فَبَشِّرۡهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٖ

Transliteration: (Yasma'u Aayaatil laahi tutlaa 'alaihi summa yusirru mustakbiran ka-al lam yasma'haa fabashshirhu bi'azaabin aleem)

जो अल्लाह की आयतें अपने सामने पढ़ी जाती सुनता है, फिर तकब्बुर करते हुए अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है [12], गोया उसने उन्हें सुना ही नहीं; तो आप उसे दर्दनाक [13] अज़ाब की खुशखबरी सुना दीजिए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 8

"जो अल्लाह की आयतें अपने सामने पढ़ी जाती सुनता है, फिर तकब्बुर करते हुए अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है [12], गोया उसने उन्हें सुना ही नहीं; तो आप उसे दर्दनाक [13] अज़ाब की खुशखबरी सुना दीजिए।"

[12] तकब्बुर ईमान की राह में सबसे बड़ी रुकावट

यह उस बदबख़्त का हाल बयान करती है जो अल्लाह की आयतों को सुनने के बावजूद अपने कुफ़्र, हठधर्मी और घमंड को नहीं छोड़ता। इससे मालूम हुआ कि तकब्बुर और ज़िद इंसान के दिल पर ऐसा ताला लगा देते हैं जो उसे ईमान की दौलत से महरूम कर देता है।

[13] दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक सज़ा

ऐसे मुतक़ब्बिर को दुनिया में, मौत के वक़्त और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब की वईद सुनाई गई है। चुनांचे नज़र बिन हारिस को ग़ज़वा-ए-बदर में क़ैदी बनाकर ज़िल्लत के साथ क़त्ल किया गया (तफ़सीर रूहुल मआनी)।

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