कुरान - 45:26 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
قُلِ ٱللَّهُ يُحۡيِيكُمۡ ثُمَّ يُمِيتُكُمۡ ثُمَّ يَجۡمَعُكُمۡ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ لَا رَيۡبَ فِيهِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Qulil laahu yuhyeekum summa yumeetukum summa yajma'ukum ilaa Yawmil Qiyaamati laa raiba feehi wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon (section 3))

आप फ़रमा दीजिए: "अल्लाह ही तुम्हें ज़िंदगी बख़्शता है [56], फिर वही तुम्हें मौत देता है, फिर वही तुम्हें क़ियामत के दिन [57] जमा फ़रमाएगा जिसमें कोई शक नहीं"; लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [58]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 26

"आप फ़रमा दीजिए: 'अल्लाह ही तुम्हें ज़िंदगी बख़्शता है [56], फिर वही तुम्हें मौत देता है, फिर वही तुम्हें क़ियामत के दिन [57] जमा फ़रमाएगा जिसमें कोई शक नहीं'; लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [58]।"

[56] हयात-ओ-ममात सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में

ऐ महबूब ﷺ! आप फ़रमा दीजिए कि तुम्हें पहली बार आदम से पैदा करके ज़िंदगी देने वाला सिर्फ़ अल्लाह है। इससे दह्रियों के इस बातिल ख़याल की तरदीद हो गई कि ज़िंदगी महज़ ज़माने या माद्दे की देन है।

[57] क़ियामत के दिन यक़ीनी जमा किया जाना

वही तुम्हें मौत देगा और फिर क़ियामत के अज़ीम दिन मैदान-ए-महशर में तमाम इंसानों को एक साथ ज़िंदा करके जमा फ़रमाएगा। इस दिन के आने में ज़र्रा बराबर भी शक नहीं।

[58] अक्सर इंसानों की ग़फ़लत

इन वाज़ेह हक़ीक़तों के बावजूद अक्सर लोग अपनी ग़फ़लत और दुनियापरस्ती की वजह से इस अज़ीम दिन को भुलाए बैठे हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now